ए कॉल टू ऑनर Friday, Jul 28 2006
इन नेताओ ने भारत को मुर्खो का देश समझ रखा है। जसंवंत सिंह ने अपनी किताब ‘ए कॉल टू ऑनर’ मे आरोप लगाया कि पी वी नरसिम्हाराव के शासनकाल मे पी एम ओ मे एक जासूस था जो हर खबर को अमरीका अपने आकाओ तक पहुंचाता था।
पुस्तक का नाम भी चुन कर रखा है ‘ए कॉल टू ऑनर’ , अब इनसे कोई पूछे काहे का ‘आनर’। ‘आनर’ तो कंधार मे बेच आये ।
जसवंतसिंह जब सरकार मे विदेश मंत्री थे, तब सो रहे थे क्या ?
मनमोहन सिंह ने ललकारा कि “साहस है तो नाम बतायें” (वैसे भी ये रहस्य है कि प्रधानमंत्री महाशय मे ललकारने की हिम्मत कहां से आयी)
जसवंतसिंह पलट गए, नाम बताने से मना कर दिया, लगे बहाने बनाने !
भारत की जनता मुरख जो ठहरी ! जब चाहे कुछ भी कह दो, जब चाहो मुकर जाओ!
वैसे कोई नयी बात तो है नही, बोफोर्स के दलालो के नाम दस दिन मे उजागर करने का दम भरने वाले , लगभग २० साल बात भी नही बता पाये है।
एक सुब्रमण्यम स्वामी भी है, जो हर दिन पता नही कहां से क्या क्या खोज लाते है। वो तो अब गनिमत है कि उनके प्रलापो पर अब कोई ध्यान नही देता !

